कहनी १३६: बरतिमाई और जक्कई 

मत्ती २०:२९-३४, मरकुस १०:४६-५२, लूका १८:३५-१९:१०

यीशु यरूशलेम के निकट पहुँच रहे थे। जब तक वे यरीहो पहुंचे, उसके चेलों के साथ एक बड़ी भीड़ मिल गयी थी। पूरे शहर में ऐसी उत्साहित भीड़ को देखना एक अनोखा दृश्य रहा होगा! बरतिमाई (अर्थ “तिमाई का पुत्र”) नाम का एक अंधा भिखारी सड़क के किनारे बैठा था। जब उसने भीड़ को आते सुना, उसने उनसे पुछा कि यह शोर कैसा है। उन्होंने उसे बताया कि यीशु नासरी है। जब उसने सुना कि वह नासरी यीशु है, तो उसने ऊँचे स्वर में पुकार पुकार कर कहना शुरु किया,“दाऊद के पुत्र यीशु, मुझ पर दया कर।”

बहुत से लोगों ने डाँट कर उसे चुप रहने को कहा। पर वह और भी ऊँचे स्वर में पुकारने लगा, “दाऊद के पुत्र, मुझ पर दया कर!”

तब यीशु रुका और बोला,“’उसे मेरे पास लाओ।’”

सो उन्होंने उस अंधे व्यक्ति को बुलाया और उससे कहा, “हिम्मत रख! खड़ा हो! वह तुझे बुला रहा है।” वह अपना कोट फेंक कर उछल पड़ा और यीशु के पास आया।

फिर यीशु ने उससे कहा,“’तू मुझ से अपने लिए क्या करवाना चाहता है?’”

अंधे ने उससे कहा,“हे रब्बी, मैं फिर से देखना चाहता हूँ।”

तब यीशु बोला,“’जा, तेरे विश्वास से तेरा उद्धार हुआ।’” फिर वह तुरंत देखने लगा और मार्ग में यीशु के पीछे हो लिया।

बरतिमाई तुरंत देखने लगा। सोचिये उसे कैसे लगा जब उसने ज्योति को देखा! परन्तु यह केवल एक ही चंगाई नहीं हुई। उसका यीशु पर विश्वास करना ही सबसे बड़ी चंगाई को लेकर आया। उसने नया जीवन पाया!

जब यीशु भीड़ के साथ आगे जा रहे थे, बरतिमाई भी उनके पीछे चलते हुए परमेश्वर कि महिमा करता जा रहा था। जब भीड़ ने बरतिमाई कि ख़ुशी को देखा, तब वे बहुत अचंबित हुए और परमेश्वर कि महिमा करने लगे।

जिस समय यीशु अपने दुःख को स्मरण करता हुआ आगे बढ़ रहे थे, उसे दूसरों के लिए दया आ रही थी। भीड़ यरीहो से निकल कर दूसरी ओर को गयी। शहर में सब रुक कर यह देख रहे होंगे कि यह सब शोर कैसा है। बहुत दिनों से वे यीशु के आने के विषय में सुन रहे थे। सब उस चमत्कार करने वाले को देखना चाहते थे जिसने कि पूरे राष्ट्र को उल्टा पुल्टा कर दिया था।

यरीहो में जक्कई नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह कद में बहुत छोटा था और उसे भीड़ के ऊपर से देखने में दिक्कत आ रही थी। परन्तु वह यीशु को देखना चाहता था। जक्कई एक कर वसूलने वाला था जिसे यहूदी लोग धुत्कारते थे। वह रोमी सरकार का एक कठपुतली था जो उनके लिए लोगों से कर वसूलता था। ना केवल यह, वह उनसे ज़रुरत से ज़यादा वसूलता था। जक्कई का काम विशेष करके बहुत दुष्ट था क्यूंकि वह सब कर वसूलने वालों का सरदार था। वह भ्रष्टाचार को अनदेखा करता था जो लोगों के लिए बोझ बन गया था। यरीहो एक मुख्य शहर था और वह भारी राहदारी जमा किया करता था।

जब भीड़ आने लगी, जक्कई को लगा कि वह यीशु को नहीं देख पाएगा यदि वह कोई ऊंचे स्थान पर नहीं चला जाता। सो वह सब के आगे दौड़ता हुआ एक गूलर के पेड़ पर जा चढ़ा।फिर जब यीशु उस स्थान पर आया तो उसने ऊपर देखते हुए जक्कई से कहा,“’जक्कई, जल्दी से नीचे उतर आ क्योंकि मुझे आज तेरे ही घर ठहरना है।’”

क्या आप कल्पना कर सकते हैं? उसके परमेश्वर पिता के प्रति आज्ञाकारिता के कारण, उसे रोकना पड़ा। उसे जक्कई के घर में एक बहुत बड़ा कार्य करना था!

बिना कोई समय बर्बाद करे, जक्कई झटपट नीचे उतरा और  प्रसन्नता के साथ उसका स्वागत किया। जब सब लोगों ने यह देखा तो वे बड़बड़ाने लगे और कहने लगे,“यह एक पापी के घर अतिथि बनने जा रहा है!”

परन्तु यीशु को भीड़ को सुनने में कोई रूचि नहीं थी। वह परमेश्वर पिता कि इच्छा को पूरी करने में वफादार था, और वह जानता था कि जक्कई के ह्रदय में एक बड़ा काम होने जा रहा है।

जक्कई खड़ा हुआ और प्रभु से बोला,“हे प्रभु, देख, मैं अपनी सारी सम्पत्ति का आधा गरीबों को दे दूँगा और यदि मैंने किसी का छल से कुछ भी लिया है तो उसे चौगुना करके लौटा दूँगा!”

यह एक वास्तविक पश्चाताप है! जक्कई पूरी तौर से परिवर्तित हो गया था! ज़रा सोचिये। वह अपनी संपत्ति से आधा बाँट रहा था, उसका घर और खेत और सोना मिलाकर। जिस किसी ने भी उसके भरष्टाचार को सहा था उसे चार गुना वापस मिलने वाला था! यह उद्धार का एक ख़ूबसूरत कार्य था! सुसमाचार के द्वारा उसके ह्रदय का परिवर्तन हो गया था!

यीशु के पीछे जो भीड़ चल रही थी वह यह देख कर खुश हुई कि उसने एक अंधे को चंगा किया। परन्तु जब उसने एक पापी पर दयालुता दिखाई, तब वे पलट गए। उन्होंने कितनी जल्दी उस मनुष्य पर अपने न्याय दिखा दिया जिसे वे मसीहा समझते थे! वे उसके राज्य को समझने के लिए बहुत दूर थे! परन्तु जक्कई ने उसे “स्वामी” कह कर पुकारा। यह कहानी यह पूछती है, “कौन वास्तव में वफादार था?”

यीशु ने उससे कहा,“’इस घर पर आज उद्धार आया है, क्योंकि यह व्यक्ति भी इब्राहीम की ही एक सन्तान है। क्योंकि मनुष्य का पुत्र जो कोई खो गया है, उसे ढूँढने और उसकी रक्षा के लिए आया है।’”

सभी यहूदी इस बात का गर्व करते थे कि वे इब्राहिम के वंश के हैं। इसका मतलब था कि वे परमेश्वर के चुने हुए लोग थे। परन्तु वे कर वसूलने वाले को अपना परिवार नहीं समझते थे। जक्कई ने यीशु पर पश्चाताप के साथ विश्वास करके यह दिखा दिया कि वह सही में इब्राहिम के परिवार का हिस्सा है। और यीशु ने यहूदियों को सुन्दर तरीके से यह दिखाया कि परमेश्वर अपनी दया और अनुग्रह उन सब पर दिखता है जो उस पर विश्वास करते हैं!

कई बार, हम में से बहुतेरे इस बात से संतुष्ट हो जाते हैं कि यीशु अपनी ज्योति उन पाखण्डी धार्मिक अगुवों पर चमकाएगा। हम में से बाकि लोग फरीसियों के हर रोज़ के तिरस्कार के साथ जीते रहते हैं।

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