कहनी १३७: आम आदमी का और जक्कई का मिलान

लूका १९:१-१०

मैं और मेरा परिवार जब येरूशलेम को जा रहे थे, तब हमें पता चला कि यीशु नासरी हमसे कुछ ही दूरी पर है। किसी को भी जल्दी चलने के लिए मुझे मनाने कि आवश्यकता नहीं पड़ी। सब उस मसीहा को देखने के लिए बहुत उत्तेजित थे! कोई भी प्रभु के महान दिन को छोड़ना नहीं चाहता था! जब हम यीशु के पास पहुँचे, वह अपने चेलों के साथ यरीहो में प्रवेश करने वाला था। समान्य तौर पर, मैं वहाँ जाना पसंद नहीं करता हूँ। जो काम मैं कर रहा था, उसके उत्पाद को मुझे यरीहो से होते हुए येरूशलेम पहुचाने होते हैं। जब भी मैं या मेरे साथी उस रास्ते से जाते थे, उस शहर के कर वसूलने वाले हमें रोक दिया करते थे। और हर बार वह राजमार्ग पर होने वाले लूटमार कि तरह था, केवल इतना था कि उनके रोमी सैनिक अपने बचाव के लिए थे।

बिना रोमियों को कर दिए व्यापार करना बहुत कठिन था।मानसिक तनाव और भय के इतने वर्षों में मुझे नहीं मालूम था कि मैं अपने परिवार को खिला पाऊंगा या नहीं या मुझे घर पर ही रहना होगा। कर ने सब चीज़ों को था। इससे बुरी बात यह थी कि जो लोग मेरी मेहनत के पैसे को ले रहे थे वे मेरे ही देशवासी थे। वे उसे रोमी राज के ख़ज़ाने में डालकर बाकि अपने पास रख लेते थे। वे अपने ही यहूदी लोगों को लूट कर के अपने लिए आलिशान घर बना लेते थे। सबसे ऊंचे दर्जे के धार्मिक अगुवों से लेकर सबसे नीच पापी तक, सब उनसे घृणा करते थे। पर्व के लिए जब हम भीड़ के साथ जा रहे थे, मुझे मालूम था कि मुझे कोई जुर्माना नहीं भरना पड़ेगा। परन्तु यरीहो को देखकर और चुंगी लेने वालों के स्थान को देखकर मैं अत्यंत क्रोधित हो जाता था। उसके अपने आराम कि ज़िन्दगी जीने के लिए मेरी बेटी को टूटे हुए जूतों में रहना पड़ा। मेरा क्रोध और भी भड़क गया!

जब हमारा कबीला उस भीड़ के निकट आया जो यीशु को घेरे हुए था, तो लोगों में हलचल मच गयी। एक जंगली आदमी उस महान शिक्षक के चारों ओर कूद रहा था। प्रत्यक्ष रूप से, वह कुछ ही समय पहले अँधा हुआ था। उसकि बेहद ख़ुशी संक्रामक थी। सारी भीड़ आनंद से भर गयी। यीशु जहां भी जाते थे अपने साथ गतिशीलता कि सम्भावनाओं को भी लेकर चलता था। मैं भी उसमें शामिल हो गया। पिछले दिनों कि जो भी जीवन में समस्याएं आई हों, लेकिन एक नया दिन आने वाला था!

जब भीड़ यरीहो के रास्ते जा रही थी, मैंने एक बौने आदमी को देखा जो इधर उधर कूद रहा था, और यीशु को देखने  का जतन कर रहा था। उसने मुझे उसे देखते हुए देख लिए क्यूंकि वह जिस तरह के कपड़े पहना था वह अपने आप को उस तरह से ढाल नहीं पा रहा था। वह इधर उधर बच्चे कि तरह कूद रहा था। मैं बहुत आनंदित हो रहा था। वह यीशु को देखने के लिए जी तोड़ कोशिश कर रहा था। सो वह गूलर के पेड़ पर चढ़ गया।

उसके बाद जो होने वाला था मैंने उसकी अपेक्षा नहीं की थी। यीशु वहाँ रुका और उसकी ओर देखा। उसके पीछे जो भीड़ आ रही थी वह अचंबित होकर रुक गयी। अधिकतर लोग नहीं जान पाये कि क्या हुआ लेकिन मैं सब सुन लिया था। यीशु उस स्थान पर आया तो उसने ऊपर देखते हुए जक्कई से कहा,“’जक्कई, जल्दी से नीचे उतर आ क्योंकि मुझे आज तेरे ही घर ठहरना है।’”

“क्या?” मैंने सोचा। “उस व्यक्ति का नाम जक्कई है?” मैं बहुत क्रोधित हुआ। जक्कई तो यरीहो के मुख्य कर वसूलने वाले का नाम है। सालों साल जब मैं अपने बच्चों कि देखभाल कर रहा था, मैं इसी रास्ते से अपने उत्पादों को लेकर आया करता था। और हर साल कर वसूलने वाले भी आया करते थे। जब वे मेरी कमाई को लूटते थे, तो मैं बेबस हो कर देखता रहता था। मेरे पास कोई सहायता नहीं थी। उन्हें रोमी राज का साथ मिलता था और जक्कई खड़ा देखता रहता था। उसकी यह हिम्मत कैसे हुई कि उस सिद्ध शिक्षक को खोजे। और यह शिक्षक ही था जिसने कि जक्कई को पुकारा।

हम सब बहुत क्रोधित हुए। यीशु को चाहिए था कि उसे डांटे। उसे फरीसियों कि तरह उसे भी सुनाना चाहिए था। लेकिन नहीं। उसके बजाय, यीशु उसे उसके नाम से पुकार रहे थे। उसने अपने आप को उसके घर पर आमंत्रित कर लिया था। यह किस प्रकार कि विकृत दुनिया थी? वह ऐसा कैसे कर सकता था?

यही सवाल बहुत समय तक मेरे ह्रदय में जलता रहा। परन्तु सवाल बदल गया। सवाल यह था कि ‘उसे कैसे मालोम था?’ क्यूंकि, उस शाम कुछ हुआ जब यीशु उस मुख्य कर वसूलने वाले के साथ भोजन कर रहे थे। जिस व्यक्ति को हम जानते थे कि वह कितना दुष्ट था, उसका पूर्ण परिवर्तन हो गया था। जिस रात यीशु उसके घर आये, उसके साथ जो भी बातें उसने कहीं, वो सब जगह फ़ैल गयीं। जक्कई सब कुछ सही कर रहा था। वह हर उस व्यक्ति के पास जाकर जिन्हे उसने धोखा दिया था उसे चार गुना लौटा दिया। मैं विश्वास नहीं कर पा रहा था, जब तक एक संदेशा देने वाला आ गया था। वह यरीहो से आया था जिस जक्कई ने भेजा था। मुझे नहीं मालूम उसे कैसे पता चला। मुझे नहीं मालूम कि कैसे ना केवल मुझे लूटने में उसकी कितनी मेहनत गई, परन्तु उन सब लोगों को कैसे इतने सालों तक लूटता रहा, लेकिन उसने किया। उसने यीशु से एक अच्छा वायदा किया। जक्कई ने मेरे घर में इतनी संपत्ति उंडेल दी कि मैं सोच भी नहीं सकता। यीशु को चमत्कार करते पहले भी देखा है, लेकिन इस चमत्कार ने तो मुझे अचंबित कर दिया। उसने एक लालची इंसान को चंगा किया, और उसने भ्रष्टाचार के गहरे घाव को भी चंगा कर दिया। अब जब हम गलील से येरूशलेम कि ओर जाते हैं, हम उन घरों कि ओर देखते हैं जो जक्कई के हुआ करते थे। क्रोध चला गया, और एक समय जहाँ द्वेष और संघर्ष था, वहाँ अब आशा और शांति का सन्देश है।

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