कहानी १७७: जीवन का सबूत

मत्ती २८:११-१५; मरकुस १६:१२-१५; लूका २४:१३-३५

Conversion of Saul

परमेश्वर की दिव्य योजना का चमत्कार, भूकंप की शक्ति और महिमा, लुड़काए हुए पत्थर, शानदार स्वर्गदूतों, और उनके दुखियारे दोस्तों से कहे गए प्यार के शब्दों से प्रकट हुई। इस बीच, महायाजक एक बार फिर से एक उन्माद में थे। बात यह थी कि कब्र की रखवाली कर रहा रोमी पहरेदार वहां आया था। उन्होंने उस शानदार स्वर्गदूत और पत्थर के लुड़काए जाने के बारे में बताया। पर इन चमत्कारी कामों से यरूशलेम के महायाजकों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। क्या यह विचित्र नहीं लगता कि कुछ अविश्वासी सैनिकों के दल ने एक स्वर्गदूत देखने का दावा किया था, ठीक वैसे ही जैसे यहूदी धर्मग्रंथों में वर्णित किया गया है? क्या उन्हें यह भय नहीं था कि कहीं न कहीं, परमेश्वर का हाथ यीशु के पक्ष में था?

जाहिर है नहीं, क्यूंकि उनकी पहली प्रतिक्रिया एक और धोखाधड़ी करने की थी। उन्होंने एक बार फिर बड़ों और महायाजकों को एक साथ बुलाया। उन्हीने गुप्त में आने वाले अफवाहों को खामोश करने के तरीकों पर विचार विमर्श किया। खुली कब्र और यीशु के शरीर के लापता होने की खबर का फैलना लिखा था। जब लोग इसके बारे में सुनेंगे, तो वे निश्चित रूप से यीशु को मसीहा करार करेंगे। यह अचानक बहुत स्पष्ट हो जाएगा कि धार्मिक नेताओं ने परमेश्वर के अपने दूत को मौत की घाटी उतार दिया। उनको यह रोकना होगा। इसलिए उन्होंने पैसे की एक बड़ी राशि एकत्र की और सैनिकों को झूठ बोलने के लिए रिश्वत दी। वे उनकी कहानी बोलने के लिए तैयार हो गए।

बात असल में यह थी कि अगर एक रोमी सैनिक पहरा दे रहा था, यह एक बड़ा अपराध था अगर वो अपनी ज़िम्मेदारी ना निभा पाए। उन्हें मौत की घाटी उतरना पड़ता था। सैनिक उन सुबह के घंटों की घटनाओं को कैसे समझा सकता थे? वे अदालत को यह तो नहीं कह सकते थे कि एक शक्तिशाली स्वर्गदूत वहां आया था। अगर वे झूठ बोलते और कहते कि वे सभी सो गए थे, तो वे इस बात का दावा कर रहे होते कि चेलों ने आकर शरीर को चुरा लिया है। तब, कोई भी मसीह के अनुयायियों पर विश्वास नहीं करता ; क्यूंकि कौन सा सैनिक अपने जीवन को जोखिम में डालकर ऐसी बात  की गवाही करता? तब महायाजक और बड़ों ने सैनिकों को वादा किया कि अगर कभी यह बात राज्यपाल तक कभी पहुंची, तो वे हस्तक्षेप करके उनको प्राणदंड से बचा लेंगे। दोनों पक्षों को इसमें फैदा था।

क्या आप इन लोगों की मूर्खता की कल्पना कर सकते हैं? कौन एक स्वर्गीय दूत के आने के बारे में झूठ कहता?क्या कुछ भी उनके पश्चाताप का कारण नहीं बनेगी? लेकिन उनके दिल इतने कठोर थे कि इस सब का कोई फैदा नहीं था। बस एक सप्ताह पहले ही, यीशु ने एक अमीर आदमी और लाजर के बारे में एक दृष्टान्त बताया। उस कहानी में, यीशु ने यह कहा कि जो कोई सच में पुराने नियम के परमेश्वर को प्यार करता, वो उनके अपने शब्दों को भी प्यार और सम्मानित करता। उन्होंने इस बात की चेतावनी भी दी कि जिनका दिल कठोर है, वो तब भी पश्चाताप नहीं करेंगे अगर कोई मुर्दों में से जी उठे। याजकों, फरीसियों और बड़ों ने इस चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया, और अब यह सच हो रहा था। वे पूरी तरह से परमेश्वर के शातिर दुश्मन के काम में लगे थे – वो था परमेश्वर के वैभवपूर्ण, नए काम को लोगों से छिपाना और मसीह के पुनुरुथान का शुभ सन्देश लोगों से दूर रखना।

इन छोटे पुरुषों के लिए यह विश्वास करना कितनी मूर्खता थी कि वे परमेश्वर की योजना को विफल कर सकते है। असल में, यह उनके परमेश्वर पर अविश्वास का संकेत करता है। वे केवल सत्ता के लिए अपनी इच्छा के प्रकाश में चीजों को देख रहे थे। लेकिन इसराइल में यह हर किसी के लिए सच नहीं था। परमेश्वर ने कईयों को अपना बनाया था, और शुभ सन्देश उन्हें बहुत स्पष्ट से समझ आता!

ऐसे दो पुरुष, फसह पर्व के बाद अपने घर जा रहे थे। वे इम्मौस को जा रहे थे जो यरूशलेम से सात मील की दूरी पर था। जैसे वे चल रहे थे, वे पर्व पर हुई उन अविश्वसनीय बातों के बारे में चर्चा कर रहे थे। वे गहरी बातचीत में चल रहे थे जब यीशु भी उनके साथ शामिल हुए। उनकी आँखें को उसे पहचानने से रखा गया था, तो वे उन्हें एक अजनबी के रूप में देख रहे थे। यीशु ने पुछा :“यह कौन से शब्द है जो तुम एक दूसरे के साथ आदान प्रदान कर रहे हो ?”

पुरुष वहीँ रुक गए। इस सवाल ने उनको गहरी उदासी में डाल दिया। क्या इस आदमी को वास्तव में नहीं पता था? पुरुषों में से एक का नाम क्लीओपस था। उसने पूछा, “‘क्या येरूशलेम में होने वाली बातों के बारे  में तुम कुछ नहीं जानते ?”

यीशु ने पूछा ”क्या बातें?”

वे कितने चकित हुए होंगे! क्या यह आदमी दीन  दुनिया से अलग किसी गढढे  में रहता था? उन्होंने कहा: ‘‘यीशु नासरी के बारे में -जो परमेश्वर और सब लोगों की दृष्टि में कर्म और वचन में एक शक्तिशाली नबी था , और कैसे मुख्य याजकों और हमारे शासकों ने उन्हें मौत की सजा सुनाई। लेकिन हम इस बात की आशा कर रहे थे कि वह इसराइल के राज्य को मुक्त करेगा। दरअसल, इस सब के अलावा, इन बातों को हुए तीन दिन हो गए है। और तो और, हमारे बीच कुछ महिलाओं ने हमें चकित कर दिया। जब वे सुबह जल्दी कब्र पर गई और उनको शरीर को वहां नहीं पाया, तो वे वापस यह कहते हुए आई कि उन्होंने  स्वप्न में स्वर्गदूतों को देखा था जिन्होंने कहा कि यीशु जिंदा है। और हम में से कुछ कब्र पे गए और सब कुछ वैसे ही पाया जैसे महिलाओं ने देखा, लेकिन यीशु  नहीं दिखाई दिए।”

तब यीशु ने कहा : ‘हे ​​मूर्ख आदमी और कमज़ोर दिल। तुमने नबियों के बोल पर विश्वास नहीं किया! क्या यह मसीह के लिए आवश्यक नहीं था कि वो इन बातों की पीड़ा उठाए और अपनी महिमा में प्रवेश करे? ‘”

तब यीशु ने उन्हें इतिहास के सबकों के इतिहास में सबसे अच्छा इतिहास सबक दिया। उन्होंने मूसा के साथ शुरू किया और फिर सारे नबियों के बारे में – यह दिखाने के लिए कि वो कैसे पूरे पुराने नियम भर मसीह के आने के बारे में बताते थे। यह एक बहुत ही दिलचस्प सफ़र रहा होगा। जैसे जैसे वे चल रहे थे, उनके सामने इतिहास के सैकड़ों वर्ष सामने थे। आखिरकार, वे एप्रैम पर पहुंचे। यीशु और आगे जाना चाहते थे। पुरुष नहीं चाहते थे कि वो जाए। “‘हमारे साथ रहिये” उन्होंने कहा”‘ अब शाम की ओर हो रहा है और दिन अब लगभग खत्म हो गया है।” तो वह उनके घर चले गए।

भोजन का समय आया, और जब यीशु मेज के पास बैठे, उन्होंने कुछ रोटी ली और उसे तोड़ी। फिर वह उन्हें एक एक टुकड़ा देने लगे। अचानक, वे यह जाने कि यह खुद यीशु ही है! उनकी आँखें खुल गई थी! इसके तत्काल बाद, वह उनकी नजर से गायब हो गए।

यीशु के लिए यह कितनी खुशी की बात होगी कि वह इस चमत्कारिक ढंग से अपने प्रिय मित्रों के जीवन में आए, और उन गौरवशाली बाते जो उन्होंने उनके लिए की, उसके मानो छोटी छोटी खिड़कियाँ खोल दे।  पुरुष वहाँ बैठे दंग रह गए, और वे कहने लगे, “‘क्या हमारे दिल भीतर से नहीं जल रहे थे जब वो हमसे रास्ते में बात कर रहे थे और वचन सिखा रहे थे?'”उस ही घंटे के भीतर, पुरुष उठे और यरूशलेम को वापस चले गए। उन्हें चेलों को बताना था!

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s