कहानी १८२: तट के किनारे सैर 

Sea of Galilee in Israel

युहन्ना २१:१५-२५

चेले नाश्ता खाने के बाद उठकर तट के किनारे चलने लगे। परमेश्वर ने पतरस से कहा, ‘शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तुम सच में मुझे इन से अधिक प्यार करते हो ?”

इसका क्या मतलब था? और उसने ऐसा क्यों पूछा? खैर, पतरस को हाल ही में एक भारी विफलता का सामना करना पड़ा था। उसने सार्वजनिक रूप में प्रभु के साथ विश्वासघात किया था। अब प्रभु पतरस को एक सार्वजनिक तरीके से बहाल करने जा रहे थे।

यीशु की गिरफ्तारी की रात पर जब यीशु आगे होने वाली बातों के बारे में समझा रहे थे, अन्य सभी चेले शांत हो गए। वह केवल पतरस ही था जिसने बड़े साहस से यह घोषणा की कि वह प्रभु का इनकार कभी नहीं करेगा। उसके इस वफादार संकल्प के घोषणा के बाद ही, अन्य चेलों को ऐसा करने के लिए साहस आया। पर पतरस के साड़ी बहादुरी और दृढ़ संकल्प के बावजूद, उसकी अपनी मानव शक्ति पर्याप्त नहीं थी। महत्वपूर्ण और संकटपूर्ण घंटे में, जब वफादारी सबसे पवित्र गुण था, वह कमजोर पड़ गया और ऐसा करने में विफल हुआ। और मामला इस बात से बदतर हो जाता है कि वह एक रोमन सैनिक के चेहरे में और न मौत की धमकी पर अस्थिर हो गया। उसने ऐसा इनकार एक छोटी गुलाम लड़की के पूछताछ में ही कर दिया। और यह हर कोई जानता था।

यीशु पहले ही समझ गए थे कि क्या होने जा रहा था और उसे चेतावनी दी, लेकिन पतरस इसे सुनना सहन नहीं कर सका। उसने इस बात का विश्वास करने से इनकार किया कि वह ऐसी बात कर सकता है। लेकिन यीशु जानता था कि शैतान, जो परमेश्वर का शक्तिशाली दुश्मन था, वही चालबाज़ साँप जिसने आदम और हव्वा की परीक्षा ली थी, पतरस के पीछे जाने की अनुमति माँगी थी, और परमेश्वर ने “हाँ” भरी थी। स्वर्गीय पिता अपने दुश्मन के नापाक इरादों का उपयोग करने के लिए जा रहा था ताकि वो अपने सेवक की परीक्षा ले सके जो उसके बेटे यीशु के लिए समर्पित था। पतरस को अपने स्वयं की प्रचुरता और गर्व से छुटकारा पाने के लिए एक महान तोड़ने की प्रक्रिया से जाना था।

पतरस को यह कुछ भी समझ में नहीं आया। वह इस भ्रम में था कि वह अपने स्वयं के बल से सब कुछ कर सकता है। लेकिन यह उस आदमी के लिए अतिरिक्त नहीं था जिसे ‘कलीसिया की चट्टान’ बनना था। अगर उसे मार्गदर्शन करना था, तो उसे यह सीखना होगा कि  वह कितना कमजोर है ताकि वह परमप्रधान परमेश्वर की शक्ति पर निर्भर हो सके।

यह दर्दनाक सबक था,  पर रंग भी लाया। पतरस अपने विश्वासघात के बाद उन भयानक दिनों में खुद के अंत तक आ गया था। यीशु ने अपने जी उठने के बाद अपने को पहले पतरस को प्रकट किया। इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं है कि उनके बीच क्या वार्तालाप हुई, लेकिन हम केवल कल्पना कर सकते है कि पतरस ने अपने स्वामी की ओर  कितना दु: ख और पश्चाताप प्रकट किया होगा। उन्होंने प्रभु और सेवक जैसे कितना करीबी और पवित्र क्षण गुज़ारा होगा।

अब जैसे वो गलील के सागर के तट पर चल रहे थे, यीशु पतरस से उसके प्रति अपने प्यार की पुन: पुष्टि कर रहे थे। इस बार, यह वार्तालाप अन्य चेलों के सामने हो रहा था और वो यह सब सुन सकते थे। पतरस वास्तव में परमेश्वर का चुन हुआ अगुआ होने को था, लेकिन पतरस के इनकार की कहानी उसके लिए उनके सम्मान को क्षतिग्रस्त कर सकती थी। क्या वह अनुग्रह से गिर गया था? यीशु उसे सम्मान के साथ बहाल करने के लिए सुनिश्चित कर रहे थे।

फिर भी, इस सवाल ने पतरस को भेद होगा। ‘हाँ, प्रभु,’ उसने कहा, ‘आप जानते हैं कि मैं आपसे प्यार करता हूँ’।पतरस को यह विश्वास था कि यीशु जानता था। अपने महान असफलताओं के बावजूद, उसका प्यार वास्तव था।

यीशु ने उत्तर दिया, ‘मेरे मेमनों को खिलाओ’। पतरस को यीशु के लिए प्यार उसके लोगों की देखरेख करके दिखाना था। यीशु ने अपने आप को ‘भला चरवाहा’ के रूप में वर्णित किया था, और पतरस उनका सेवक था। प्रभु उसे अपनी सबसे क़ीमती संपत्ति को विश्वास समेत सौपने जा रहा था।

प्रभु ने फिर से पूछा, “‘शमौन, यूहन्ना के बेटे, क्या तुम मुझे प्यार करते हो?”

यह प्रश्न दो बार पूछने का क्या मतलब हो सकता है? ‘हाँ, प्रभु,’ पतरस ने कहा, ‘आप जानते हैं कि मैं आपसे प्यार करता हूँ’।पतरस अपने प्यार की सच्चाई का प्रमाण देने के लिए किसी वीर प्रदर्शन या वफादारी की घोषणा पर निर्भर नहीं करने जा रहा था। वो मसीह के बुध्धिमत्ता और ज्ञान पर निर्भर था। वह जानता था कि यीशु जानता था, क्योंकि पतरस को विश्वास था कि यीशु सब कुछ जानता है। यही सबसे मुख्य बात थी।

“मेरी भेड़ों की देखभाल करना, ‘यीशु ने कहा। उनके दूसरे अनुरोध के साथ, पतरस के कार्य का गहरा महत्व दिख रहा था। यह पतरस के लिए एक ऐसी भूमिका थी जो उसके खुद के लिए थी, और उसके चेलों को भी यह मालूम होना था, क्योंकि वे उसके साथ कलीसिया के निर्माण में शामिल होंगे। हालांकि यीशु ने नहीं कहा था, “यह सच है, तुम मुझे इन सब से ज्यादा प्यार करते हो,” उनका मतलब यही था। अगर उनका यह मतलब नहीं होता, तो वह पतरस के आगे ऐसा महत्वपूर्ण काम नहीं रखते। पतरस को अपनी स्वाभाविक प्रतिभा, बल या आकर्षण की वजह से इस कलीसिया का अगुआ नहीं बनाया गया था। उसे यीशु मसीह के प्रति समर्पण, प्यार और भक्ति की वजह से उन्नत किया गया था। यह एक सबसे जरूरी बात है।

एक बार फिर, यीशु ने पतरस से पुछा, “‘शमौन, यूहन्ना के बेटे, क्या तुम मुझे प्यार करते हो?” तीसरी बार पतरस के लिए एक कड़वे डंक की तरह लगा होगा। यह उस खंडन की संख्या है जिसके बारे में यीशु ने भविष्यवाणी की थी कि वह कितनी बार येशु के महान पीड़ा के समय में उद्धारकर्ता का इनकार करेग। और फिर पतरस बोला, ‘हे प्रभु, आप को सब कुछ पता है। आपको पता है कि मैं आपसे प्यार करता हूँ’।पतरस के पास सिर्फ भरोसा था पर यीशु दिव्य था। वह हर झूठ से हर सच जानता था। वह जानता था कि पतरस उससे प्यार करता था।

यीशु ने कहा, ‘मेरी भेड़ों को चराओ। मैं तुम्हे सच बोलता हूँ, जब तुम छोटे थे, तो तुम अपने आप को तैयार करते थे और जहाँ चाहते उधर चले जाते, लेकिन जब तुम बूढ़े हो जाओगे, तो तू अपना हाथ बढाओगे, और कोई और तुम्हे कपड़े पहनाएगा और वहां ले जाएगा जहाँ तुम जाना नहीं चाहते हो’।

वाह। अब मसीह एक और भविष्यवाणी कर रहे थे। पतरस वास्तव में यीशु को प्यार करता था, और एक दिन मौत के मुंह में अपनी वफादारी दिखाएगा। हालांकि पतरस ने अपने प्रारंभिक वर्ष अपने ऊपर खर्च किये, उसके आगे का जीवन, मसीह के राज्य के लिए समर्पित होगा। अंत में, उसके हाथ क्रूस पर चढ़ाने के लिए फैला दिए जाएंगे। उसका जीवन यीशु के जीवन की तरह उसकी पीड़ा में भी होगा। और जैसे  यीशु अपने पिता को महिमा लाए, पतरस को भी मसीह के लिए महिमा लाना होगा। कलीसिया में अगुआ होने के नाते, पतरस के मौत की खबर दूर दूर तक पहुंचेगी। ऐसे निर्बाध और पूर्ण विश्वासयोग्यता को कौन समझा सकता था? उसके बलिदान की सीमा उसका येशु के प्रति प्यार का माप था, और यह उसके उद्धारकर्ता को आदर और प्रतिष्ठा लाएगी।

लेकिन यह कई दशकों के बाद होना था। अभी के लिए यीशु ने कहा, ‘ मेरे पीछे चलो’। कल्पना कीजिये कि आप अपने जीवन के अंत में यह जाने कि आप को क्रूस पर चढ़ाया जाएगा। कल्पना कीजिये कि इसको जानना परमेश्वर की योजना का हिस्सा था, और उसके बावजूद भी उसके पीछे आपको चलना होगा। इसको पतरस के प्यार की गहराई के अलावा समझने का कोई रास्ता नहीं था। और पतरस इसी उच्च शिष्यत्व का भार उठाने को था।

लेकिन यह बातों पतरस के मन पर नहीं थी, जब उसने यह सुनी। इसके बजाय, उसने मुड़ कर युहन्ना को देखा। ‘हे प्रभु, क्या इस आदमी के बारे में?’ क्या युहन्ना भी दुःख सहेगा? युहन्ना तो यीशु के इतने करीबी था कि गिरफ्तारी की रात वो यीशु के सीने पर टिका हुआ था।जैसे यीशु चेलों को समझा रहे थे कि उनमे से कोई उसे पकड़वाएगा, पतरस को युहन्ना को पीछे टिकने को बोलना पड़ा ताकि वह प्रभु से पूछ सके कि वो गद्दार कौन है। यदि पतरस को पीड़ा सहने के लिए बुलाया गया था, तो युहन्ना को क्या होने जा रहा था?

यीशु ने कहा, ‘अगर मैं उसे अपने वापस आने तक जीवित चाहता हूँ, तो उससे तुम्हे क्या? तुम्हे मेरे पीछे चलना होगा’। यीशु पतरस को कह रहा था, ‘इससे तुम्हारा कोई लेना देना नहीं है’! क्योंकि बात यह हैं कि  यीशु फिर वापस आएगा, और अगर परमेश्वर ने यह ठहराया कि युहन्ना इतने लंबे समय तक जीवित रहेगा, वो सर्वशक्तिमान ईश्वर का वो सही निर्णय होगा।

अब, क्योंकि यीशु ने यह कहा, अफवाहें फैलने लगी। लोग यह कहने लगे कि युहन्ना कभी नहीं मरेगा। लेकिन यीशु ने यह नहीं कहा था। वह पतरस को यह बता रहा था कि परमेश्वर के चुने हुओं का जीवन और मौत उस पर निर्भर है। पतरस को अपने जीवन के लिए परमेश्वर की योजना पर भरोसा करना था, न की परमेश्वर की योजना किसी और के जीवन से मापना!

एक दिन पतरस को येशु की तरह क्रूस पर टंगना था। बाइबिल इस बात का विवरण नहीं करती है कि कैसे पतरस ने अपना जीवन यीशु के लिए दे दिया। हम जानते हैं कि यह घटना इस भविष्वाणी के तीन दशकों के बाद हुई, और हम यह जानते हैं कि उसने रोम में एक क्रूस पर यीशु के लिए अपनी जान दे दी। युहन्ना के सुसमाचार लिखने के बाद ही यह घटना घट चुकी थी। जो भी शर्म और खेद पतरस ने अपने प्रभु का इनकार करके महसूस किया, उसके प्रभु सेवा और विनम्रता के जीवन से अभिभूत था।

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