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कहानी १८३: गलील के एक पहाड़ी पर

मत्ती २८:१६-२०, प्रेरितों के काम १:१-१२

Jesus comes from heaven

यीशु ने अपने चेलों को उसे गलील के एक पहाड़ी पर मिलने को कहा। शायद वह उन्हें वहाँ इसलिए इकट्ठा करना चाहते थे ताकि जो लोग इसराइल के उत्तरी भाग में सागर के किनारे उस पर विश्वास करते थे, यीशु को अपनी आँखों से देखते कि वह कैसे मर जाने के बाद भी मुर्दों में से जी उठा। हम यीशु के इस चयन की वजह को यकीन से नहीं कह सकते है। पर हम यह जानते हैं कि एक समय पर वह पांच सौ से अधिक लोगों को दिखाई दिया था। यह दिलचस्प है कि यीशु केवल उन लोगो को प्रकट हुए जो उस पर सच्चा विशवास रखते थे। यीशु को महायाजकों या पीलातुस के सामने प्रकट होकर अपनी बात साबित करने के लिए कोई रूचि नहीं थी। वह उनके पास आए जो उसे प्यार करते थे और उस पर अपनी आशा डालते थे।

जब यीशु ने गलील के पहाड़ी पर खुद को प्रकट किया, तो लोग उसे देख कर उसकी आराधना करने लगे। इस सब के बावजूद भी, उनके कुछ चेलो के मन में शंका थी।

यीशु के पास उनके लिए एक संदेश था, और यह उसकी भीड़ से राज्य के बारे में अंतिम शिक्षण था। केवल इस बार, वह सीधे सीधे आदेश दे रहा था। इसलिए क्यूंकि यह द्वेष भरे धार्मिक नेताओं, उत्सुक दर्शक, और रोमांच चाहने वालों की भीड़ नहीं थी। ये विश्वासयोग्य थे, और उनके आगे का मार्ग उत्तम, श्रेष्ठ और भला था। एक कार्य आगे था! उन सभी बारो में से जब वो इस सागर को देखते हुए  प्रचार किया करते थे, यह उनमें से आखरी बार था जब वो उनके सामने शारीरिक रूप में शिक्षण दे रहे थे। जैसे आप देखते हैं, हालात गंभीरता से उसके जी उठने के बाद बदल चुके थे, और यीशु अब उनके मुख्य शिक्षक नहीं थे। पवित्र आत्मा उतरने वाली थी, और यीशु वापस अपने पिता के पास जाने को थे। प्रभु ने यह कहा:
यीशु ने उन के पास आकर कहा, कि स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिक्कारने मुझे दिया गया है। इसलिथे तुम जाकर सब जातियोंके लोगोंको चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा  दो। और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अंत तक सदैव तुम्हारे संग हूं।।

इन शक्तिशाली शब्दों से मत्ती ने अपनी पुस्तक को समाप्त करने के लिए चुना। वे उसके के लिए इतने महत्वपूर्ण थे, कि वो यह छवि अपनी किताब पढ़ने वालो के दिमाग में बैठना चाहते था। आप क्यों सोचते हैं कि वे बहुत महत्वपूर्ण थे?

क्योंकि वे न केवल उस पीढ़ी के थे जो यीशु के संगती में रह कर उसके वचनों पर चलते थे। वे उन सभी पीड़ीओं को दर्शाते थे जो तब से अब तक मसीह के पीछे चलते हैं! हमें यीशु की तरह उसके राज्य का संदेश फैलाना है। यीशु इसराइल के राष्ट्र को अपने आने की  घोषणा करने के लिए आए थे। संदेश यह था की दुनिया के सभी देशों में जाकर मसीह यीशु के राज्य के बारे में बताना। हम सभी अपने आप को चेले कहला सकते हैं अगर हम दूसरों को यीशु के पीछे चलने का प्रोत्साहन दे रहे हैं। हर पीढ़ी के दौरान, लोगों को, परमेश्वर पिता ने अपने बेटे को दिया है। जैसे जैसे इस पीड़ी के चेले सुसमाचार को फैलायेंगे, वैसे वैसे उसके चुने हुए लोग उनके शिक्षण के माध्यम से उसकी आवाज सुनेंगे। जैसे वे यीशु मसीह पर अपने विश्वास डालेंगे, वैसे ही उनकी यीशु के ओर प्रतिज्ञा, बपतिस्मे के माध्यम से उनके बाहरी जीवन में प्रकट होगी। वे भी पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के प्यार और धार्मिकता में जुड़ जाएंगे। और उनके यीशु मसीह के प्रति समर्पण की वजह से, वे उसकी आज्ञाओं का पालन करने की लालसा करेंगे।

सभी विश्वासियों का यह अद्भुत उद्देश्य एक आश्चर्यजनक समाचार से और भी दुगना हो जाता है। यीशु को स्वर्ग में और पृथ्वी पर सभी वस्तुओं पर अधिकार दिया गया था। अंतिम जीत तब हुई जब वो मर के फिर जीवित हो गए। परमेश्वर के महान और पहले से  ठहराए हुए योजनाओं में, शापित दुनिया पिसती चली जाएगी। शैतान और उसकी दुष्ट सेना मानव जाति पर बुराई और विनाश लाने के लिए जारी रहेगी। लेकिन परमेश्वर के राज्य के नए, चमकते, स्वर्ण बीज अब बड़ना शुरू हो गए थे, और दुनिया में कुछ भी इसे रोक नहीं पाएगी, कभी भी नहीं। इसलिए, क्यूंकि प्रभु मसीह हमेशा और सर्वदा अपने चेलों के साथ रहते है,  और अपनी आत्मा से उन्हें सशक्त बनाते है  वो उसका वचन फैला सकते है और परमेश्वर की सामर्थ से उसके सुंदर, धर्मी रास्तों पर चल सकते है।

चालीस दिन के लिए ,विभिन्न समय पर, यीशु  प्रकट हुए ताकि वो उनको उनके राज्य में नए जीवन के बारे में और बता सके। वो याकूब, अपने भाई, के पास आए ; वो भाई जो उस पर उसके जी उठने से पहले विश्वास नहीं करता था। यीशु के फिर जी उठने के बाद ही, याकूब ने सचमुच विश्वास किया। परमेश्वर उसे यरूशलेम के मण्डली का अगुआ बनाना चाहते थे।

उन चालीस दिनों में कहीं, सभी चेले यरूशलेम को वापस आए क्यूंकि यीशु ने उन्हें बताया था की वहीँ से माहान नए काम शुरू होंगे। यीशु ने उनको सिखाते हुए यह बोला की वे येरूशलेम को ना छोड़े, जब तक यह सब बातें पूरी ना हो। जब तक पवित्र आत्मा उन पर ना उतरती, जैसे की यीशु ने उनसे वादा किया था, उनको वही प्रतीक्षा करना था। फिर यीशु ने कहा, ‘..युहन्ना ने तो तुम्हे पानी से बपतिस्मा दिया है, लेकिन कुछ ही दिनों में तुम्हारा बपतिस्मा पवित्र आत्मा के साथ किया जाएगा।’

चेले सवालों से भरे थे। यीशु मसीह के मृत्यु और जी उठने से वे अचम्बे में डल गए थे, लेकिन उन्हें अभी भी अपने मसीहा के वादे याद थे। यशायाह की पुस्तक में, एक समय की भविष्यवाणी की गई थी  जब परमेश्वर इसराइल को फिर से उठाएगा और उसे दुनिया का  सबसे बड़ा देश बनाएगा। अब जबकि यीशु के पास स्पष्ट रूप से जीवन और मृत्यु पर अधिकार था, यह सब का होना और भी संभव लग रहा था। क्या पवित्र आत्मा उन्हें यह सब करने की सामर्थ देगी? तो उन्होंने यीशु से पुछा, ” प्रभु, क्या वो समय आ गया है जब आप इस्राएल के  राज्य को फिर से खड़ा करेंगे?

यीशु ने कहा: उस ने उन से कहा; उन समयोंया कालोंको जानना, जिन को पिता ने अपके ही अधिक्कारने में रखा है, तुम्हारा काम नहीं। परंतु जब पवित्र आत्क़ा तुम पर आएगा तब तुम सामर्य पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे।

प्रभु और उसके चेले यरूशलेम की ऊंची दीवारों पार कर, नीचे किद्रों घाटी की ओर निकल पड़े। कल्पना करिए की जब उन्होंने गत्समिनी के बाग़ ( जो जैतून के पहाड़ के किनारे है), पार किया होगा, तो उनके मन में क्या विचार आए होंगे।पहाड़ी पर चड़ने के बाद, यीशु ने अपने हाथ उठाकर उनको आशीष दी। ये आशीष के शब्द केवल कुछ भले शब्द नहीं थे। इन आशीष के शब्दों में परमेश्वर के भले और सिद्ध योजना को पूर्ण करने की क्षमता थी। जब यीशु यह आशीष दे ही रहे थे, तो दिखने में ऐसा लगा जैसे वे ऊपर की ओर उठने लगे। जब तक वह एक बादल में गायब न हो गए, चेले ऊपर की ओर निहारते रहे। जब वे इस आश्चर्यजनक पुरुष ,जो परमेश्वर भी था, बादलों में जाते देख ही रहे थे,तो दो सफेद कपड़े पहने पुरुष उनके बगल में आकर खड़े हो गए। उन्होंने कहा, “‘गलील के पुरुष, तुम यहाँ खड़े होकर आकाश की तरफ क्यों देख रहे हो? यह यीशु, जो स्वर्ग में उठा लिया गया है, इसी प्रकार से दोबारा आएँगे।”

वाह! किसी दिन वह वापस आएँगे, और हम जानते हैं कि वास्तव में कैसे और कहाँ! जो चेलों ने उस दिन नहीं देखा था, वो यह कि जैसे ही यीशु स्वर्ग में पहुंचे, उन्होंने अपने जगह ली। कहाँ? एक शाही, शाश्वत सिंहासन पर जो परमेश्वर के दाहिने हाथ पर था! वाह! क्या आप इस विजयी ‘घर-वापसी’ के स्वर्गीय जश्न की कल्पना कर सकते हैं? यीशु ने अपना काम पूरा किया!

इस बीच, चेले जैतुन पहाड़ी की ढलानों से नीचे, यरूशलेम शहर वापस चले गए। वे एक ऐसे आनंद से भर गए थे जिसका  न कोई ठिकाना था,  और न समझाया जा सकता था। वो प्रभु की प्रशंसा करने लगे और आने वाली बातों की आस लगाने लगे।

युहन्ना अन्य चेलों में से सबसे लंबे समय जीवित रहा। वह परमेश्वर  की सेवा और उसकी मण्डली की देखरेख कई दशकों तक करता रहा। जबकि मसीह के अनुयाइयों ने रोमन सरकार के हाथों भयानक उत्पीड़न सहा, परमेश्वर की मण्डली विश्वास, बल और संख्या में बढती रही। युहन्ना के मरने से कुछ साल पूर्व, उसने एक इंजील (किताब) लिखी जिसमे ऐसी अतिरिक्त जानकारी है जो मत्ती, मरकुस, या लूका में नहीं पाई जा सकती है। उसमे ऐसे शानदार दृष्टि प्रदर्शित है, जो यीशु मसीह को ‘परमेश्वर’ दिखाती है।

युहन्ना द्वारा मण्डली को लिखे तीन पत्र नए नियम में पाए जाते हैं। हम उन्हें पढ़ सकते हैं और उसका परमेश्वर के लोगों की ओर दिल के के विषय में सीख सकते हैं। उसकी हार्दिक लालसा वही थी जो यीशु की थी: की वे एक दुसरे से प्यार रखे! युहन्ना ने बाइबल की आखरी किताब भी लिखी।उसका नाम ‘प्रकाशितवाक्य’ है। बाद के वर्षों, में प्रभु यीशु ने युहन्ना को ऊपर ले जाकर स्वर्गीय स्थानों की एक झलक दिखलाई। उन्होंने उसे वह सब चीजें दिखाई जो तब होंगी जब परमेश्वर इस श्रापित दुन्य का अंत कर देंगे। हम इसे पढ़ कर आने वाली बातों और घटनाओ को जान सकते है! तब तक, हम उसी युग में, उसी नई वाचा में है जो कि यीशु ने अपनी पहले चेलों के लिए जीती थी। हम उस मण्डली का एक हिस्सा हैं, जो परमेश्वर ने पतरस और युहन्ना द्वारा शुरू की !

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कहानी ८४: शिष्यों का भेजा जाना 

मत्ती ९:३५-१०:४२, मरकुस ६:६b-११, लूका ९ १-५

यीशु के जीवन के विषय में पढ़ते समय आपनी ध्यान दिया होगा कि, मत्ती के अध्याय पूरी तरह से मिल गए हैं। उद्धारण के लिये, हमने पांचवे अध्याय से लेकर सांतवे अध्याय को पड़ने से पहले आठवे अध्याय को पढ़ा। ऐसा इसलिए है क्यूंकि हम चारों सुसमाचारों कि कहानियों को एक साथ कर रहे हैं। सुसमाचारों के लेखक का यीशु के जीवन के विषय में लिखने का अपना ही अंदाज़ था। हम यह मानते हैं कि मत्ती ने कहानी को इस तरह लिखा कि अपने चेलों को सिखा सके कि यीशु के लिए कैसे जीना है। यह थोडा पाठ्यपुस्तक कि तरह थी। उसने अपने लिखे हुए काम को इस तरह व्यवस्थित किया ताकि दूसरों को सीखने में आसानी हो। उस व्यवस्थित कार्य को उसने पांच भागों में बात जो यीशु ने सिखाय थे। पहला भाग पहाड़ पर सन्देश का है, जो यह सिखाता है कि कैसे परमेश्वर के राज्य में जीना है। अगला भाग वो है जिसे हम अभी पढ़ने वाले हैं। वह मत्ती 10 से है, और उसमें, यीशु अपने चेलों को सिखाते हैं कि कैसे उन्हें स्वर्गराज्य के लिए सुसमाचार का प्रचार करना है।

यीशु ने सभी शहरों और गांवों में जाकर प्रचार किया। उसे भीड़ पर बहुत दया आई जो उसके पास आती थी। वे जीवन के सभी दबावों और जीवन की पीड़ा से दुखी थे। वे चरवाहे के बिना उस भेड़ के समान थे, और उस नाज़ुक जानवर जो शातिर दुश्मन के द्वारा शिकार किया जाता और ज़ख़्मी किया जाता है।तब यीशु ने अपनेचेलों से कहा,“तैयार खेत तो बहुत हैं किन्तु मज़दूर कम हैं।'” एक खेत में, समय आता है जब फल और अनाज को जमा किया जाता है। यह परिश्रम और उत्सव मनाने का समय होगा जब बहुतायत से फसल को लाया जाएगा। जब यीशु ने भीड़ को देखा जो उसके पीछे आती थी, उसने देखा कि बहुतों के ह्रदय स्वर्ग के राज्य के लिए तैयार थे।  तब यीशु ने अपने चेलों से कहा,“तैयार खेत तो बहुत हैं किन्तु मज़दूर कम हैं। इसलिए फसल के प्रभु से प्रार्थना करो कि, वह अपनी फसल को काटने के लिये मज़दूर भेजे।”

जैसे ही यीशु ने उस ज़बरदस्त आवश्यकता को देखा, उन्होंने चेलों को प्रार्थना करने के लिए कहा।यह एक बहुत ही असरदार कार्य था जो वे लोगों कि आवश्यकताओं को मिलाने के लिए कर सकते थे। क्यूंकि आप देखिये, फसल जो है वह परमेश्वर कि फसल है, और लोग उसके लोग हैं। वही है जो उनके प्रति ज़िम्मेदार था और रहेगा। चेलों कि ज़िम्मेदारी थी कि वे उन के लिए प्रार्थना करें जो परमेश्वर के महान फसल कि कटाई के सहभागी थे।

यह कितना दिलचस्प है कि कैसे परमेश्वर प्रार्थनाओं का उत्तर देता है। मत्ती के अगले ही कहानी में, यीशु ने कुछ दिलचस्प किया। उसने अपने चेलों को फसल काटने के लिए अच्छी तरह तैयार कर दिया था।

यीशु ने सबसे पहले अपने बारह चेलों के जोड़े बनाय। शमौन पतरस को उसके भाई अंद्रियास के साथ रखा। उसके बाद याकूब और यूहन्ना,फिर फिलिप्पुस और बरतुल्मै। फिर यीशु ने थोमा और मत्ती को मिलाया, और फिर हलफै और तद्दै का बेटा याकूब। आखिर में शमौन जिलौत जो यहूदा इस्करियोती के साथ रखा गया। यही वह है जो यीशु को धोखे से पकड़वाएगा। इन जोड़ों को बाहर जाकर स्वर्ग के राज्य के सुसमाचार सुनाने के लिए भेजा जा रहा था। यीशु ने उन्हें दुष्ट आत्माओं को निकलने कि सामर्थ और अधिकार दिया था। उसने उनको सब प्रकार कि बीमारियों को चंगा करने कि शक्ति दी थी।

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि चेलों को कैसा लग रहा होगा? यीशु के साथ सब जगह यात्रा करके और उसे अद्भुद कार्यों को करते देखने के बाद उन्हें भी निमंत्रण दिया गया था कि वे भी उसी सन्देश को उसी सामर्थ के साथ बाटें! उनका नया अधिकार इतना ऊपर तक पहुँच गया था कि जो गिरे हुए दूत थे वे भी इन चेलों के आधीन होगये थे! वे चेले के पद से प्रेरित बन चुके थे। उन्हें एक विशेष कार्य से भेजा जा रहा था, और यह उनके आगे के जीवन को तैयार करने के लिए परमेश्वर का महत्वपूर्ण भाग था!

यीशु ने इन बारहों को बाहर भेजते हुए आज्ञा दी कि क्या करना है और क्या नहीं। उसने कहा,
“‘गैर यहूदियों के क्षेत्र में मत जाओ तथा किसी भी सामरी नगर में प्रवेश मत करो। बल्कि इस्राएल के परिवार की खोई हुई भेड़ों के पास ही जाओ और उन्हें उपदेश दो,‘स्वर्ग का राज्य निकट है।’बीमारों को ठीक करो, मरे हुओं को जीवन दो, कोढ़ियों को चंगा करो और दुष्टात्माओं को निकालो। तुमने बिना कुछ दिये प्रभु की आशीष और शक्तियाँ पाई हैं, इसलिये उन्हें दूसरों को बिना कुछ लिये मुक्त भाव से बाँटो। अपने पटुके में सोना, चाँदी या ताँबा मत रखो। यात्रा के लिए कोई झोला तक मत लो। कोई फालतू कुर्ता, चप्पल और छड़ी मत रखो क्योंकि मज़दूर का उसके खाने पर अधिकार है।'”

“तुम लोग जब कभी किसी नगर या गाँव में जाओ तो पता करो कि वहाँ विश्वासयोग्य कौन है। फिर तब तक वहीं ठहरे रहो जब तक वहाँ से चल न दो। जब तुम किसी घर-बार में जाओ तो परिवार के लोगों का सत्कार करते हुए कहो, ‘तुम्हें शांति मिले।’ यदि घर-बार के लोग योग्य होंगे तो तुम्हारा आशीर्वाद उनके साथ साथ रहेगा और यदि वे इस योग्य न होंगे तो तुम्हारा आशीर्वाद तुम्हारे पास वापस आ जाएगा।  यदि कोई तुम्हारा स्वागत न करे या तुम्हारी बात न सुने तो उस घर या उस नगर को छोड़ दो। और अपने पाँव में लगी वहाँ की धूल वहीं झाड़ दो। मैं तुमसे सत्य कहता हूँ कि जब न्याय होगा, उस दिन उस नगर की स्थिति से सदोम और अमोरा नगरों की स्थिति कहीं अच्छी होगी। मैं तुम्हें ऐसे ही बाहर भेज रहा हूँ जैसे भेड़ों को भेड़ियों के बीच में भेजा जाये। सो साँपों की तरह चतुर और कबूतरों के समान भोले बनो।'”

“‘लोगों से सावधान रहना क्योंकि वे तुम्हें बंदी बनाकर यहूदी पंचायतों को सौंप देंगे और वे तुम्हें अपने आराधनालयों में कोड़ों से पिटवायेंगे। तुम्हें शासकों और राजाओं के सामने पेश किया जायेगा, क्योंकि तुम मेरे अनुयायी हो। तुम्हें अवसर दिया जायेगा कि तुम उनकी और ग़ैर यहूदियों को मेरे बारे में गवाही दो। जब वे तुम्हें पकड़े तो चिंता मत करना कि, तुम्हें क्या कहना है और कैसे कहना है। क्योंकि उस समय तुम्हें बता दिया जायेगा कि तुम्हें क्या बोलना है। याद रखो बोलने वाले तुम नहीं हो, बल्कि तुम्हारे परम पिता की आत्मा तुम्हारे भीतर बोलेगी।'”

“भाई अपने भाईयों को पकड़वा कर मरवा डालेंगे, माता-पिता अपने बच्चों को पकड़वायेंगे और बच्चे अपने माँ-बाप के विरुद्ध हो जायेंगे। वे उन्हें मरवा डालेंगे। मेरे नाम के कारण लोग तुमसे घृणा करेंगे किन्तु जो अंत तक टिका रहेगा उसी का उद्धार होगा। वे जब तुम्हें एक नगर में सताएँ तो तुम दूसरे में भाग जाना। मैं तुमसे सत्य कहता हूँ कि इससे पहले कि तुम इस्राएल के सभी नगरों का चक्कर पूरा करो, मनुष्य का पुत्र दुबारा आ जाएगा।'”

“शिष्य अपने गुरु से बड़ा नहीं होता और न ही कोई दास अपने स्वामी से बड़ा होता है। शिष्य को गुरु के बराबर होने में और दास को स्वामी के बराबर होने में ही संतोष करना चाहिये। जब वे घर के स्वामी को ही बैल्जा़बुल कहते हैं, तो उसके घर के दूसरे लोगों के साथ तो और भी बुरा व्यवहार करेंगे! इसलिये उनसे डरना मत क्योंकि जो कुछ छिपा है, सब उजागर होगा। और हर वह वस्तु जो गुप्त है, प्रकट की जायेगी।  मैं अँधेरे में जो कुछ तुमसे कहता हूँ, मैं चाहता हूँ, उसे तुम उजाले में कहो। मैंने जो कुछ तुम्हारे कानों में कहा है, तुम उसकी मकान की छतों पर चढ़कर, घोषणा करो। उनसे मत डरो जो तुम्हारे शरीर को नष्ट कर सकते हैं किन्तु तुम्हारी आत्मा को नहीं मार सकते। बस उस परमेश्वर से डरो जो तुम्हारे शरीर और तुम्हारी आत्मा को नरक में डालकर नष्ट कर सकता है।'”

“‘एक पैसे की दो चिड़ियाओं में से भी एक तुम्हारे परम पिता के जाने बिना और उसकी इच्छा के बिना धरती पर नहीं गिर सकती। अरे तुम्हारे तो सिर का एक एक बाल तक गिना हुआ है। इसलिये डरो मत तुम्हारा मूल्य तो वैसी अनेक चिड़ियाओं से कहीं अधिक है।

“’जो कोई मुझे सब लोगों के सामने अपनायेगा, मैं भी उसे स्वर्ग में स्थित अपने परम-पिता के सामने अपनाऊँगा। किन्तु जो कोई मुझे सब लोगों के सामने नकारेगा, मैं भी उसे स्वर्ग में स्थित परम-पिता के सामने नकारूँगा।'”

“यह मत सोचो कि मैं धरती पर शांति लाने आया हूँ। शांति नहीं बल्कि मैं तलवार का आवाहन करने आया हूँ।  मैं यह करने आया हूँ:

‘पुत्र, पिता के विरोध में,
पुत्री, माँ के विरोध में,
बहू, सास के विरोध में होंगे।
मनुष्य के शत्रु, उसके अपने घर के ही लोग होंगे।’

“जो अपने माता-पिता को मुझसे अधिक प्रेम करता है, वह मेरा होने के योग्य नहीं है। जो अपने बेटे बेटी को मुझसे ज्या़दा प्यार करता है, वह मेरा होने के योग्य नहीं है। वह जो यातनाओं का अपना क्रूस स्वयं उठाकर मेरे पीछे नहीं हो लेता, मेरा होने के योग्य नहीं है। वह जो अपनी जान बचाने की चेष्टा करता है, अपने प्राण खो देगा। किन्तु जो मेरे लिये अपनी जान देगा, वह जीवन पायेगा।'”

“जो तुम्हें अपनाता है, वह मुझे अपनाता है और जो मुझे अपनाता है, वह उस परमेश्वर को अपनाता है, जिसने मुझे भेजा है। जो किसी नबी को इसलिये अपनाता है कि वह नबी है, उसे वही प्रतिफल मिलेगा जो कि नबी को मिलता है। और यदि तुम किसी भले आदमी का इसलिये स्वागत करते हो कि वह भला आदमी है, उसे सचमुच वही प्रतिफल मिलेगा जो किसी भले आदमी को मिलना चाहिए। और यदि कोई मेरे इन भोले-भाले शिष्यों में से किसी एक को भी इसलिये एक गिलास ठंडा पानी तक दे कि वह मेरा अनुयायी है, तो मैं तुमसे सत्य कहता हूँ कि उसे इसका प्रतिफल, निश्चय ही, बिना मिले नहीं रहेगा।’”